महिला सशक्तिकरण : सामाजिक एवं आर्थिक विकास की आधारशिला

Subject:Sociology & Gender Studies
Title:महिला सशक्तिकरण : सामाजिक एवं आर्थिक विकास की आधारशिला
Author(s):डॉ. अंबिका शर्मा
Published on:30th October 2025
Published by:Lyceum India
Name of the Journal:Lyceum India Journal of Social Sciences
ISSN/E-ISSN:3048-6513
Volume & Issue:Volume: 2, Issue: 5
Pages:133-137
Original DOI (if any):10.5281/zenodo.19295269
Repository DOI: 
Abstract:महिला सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा शैक्षिक रूप से इतना सक्षम बनाना है कि वे अपने जीवन से संबंधित निर्णय स्वयं ले सकें और समाज में पुरुषों के समान अधिकार एवं अवसर प्राप्त कर सकें। किसी भी राष्ट्र का समग्र विकास तब तक संभव नहीं है जब तक उसकी आधी आबादी अर्थात् महिलाएँ विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी न निभाएँ। भारत में महिलाओं की स्थिति समय-समय पर बदलती रही है। वैदिक काल में महिलाओं को सम्मानजनक स्थान प्राप्त था, किन्तु मध्यकाल में उनकी स्थिति में गिरावट आई। आधुनिक भारत में शिक्षा, तकनीकी प्रगति, संवैधानिक अधिकारों तथा सरकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। आज महिला सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए भी अनिवार्य है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में भी लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को विशेष महत्व दिया गया है।महिला सशक्तिकरण का अर्थ एवं अवधारणा महिला सशक्तिकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से महिलाओं को अपने जीवन, संसाधनों और अवसरों पर नियंत्रण प्राप्त होता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। महिला सशक्तिकरण केवल अधिकार प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मानसिकता में परिवर्तन लाने की प्रक्रिया भी है।
Keywords:रोजगार, सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर,गतिमान, अवसर
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