भारतीय महिलायें और संवैद्यानिक अधिकार की जागरूकता

Subject:Law
Title:भारतीय महिलायें और संवैद्यानिक अधिकार की जागरूकता
Author(s):ज्योति & डॉ. मयंक कुमार
Published on:30th September 2025
Published by:Lyceum India
Name of the Journal:Lyceum India Journal of Social Sciences
ISSN/E-ISSN:3048-6513
Volume & Issue:Volume: 2, Issue: 4
Pages:128-132
Original DOI (if any):10.5281/zenodo.17257932
Repository DOI: 
Abstract:भारतीय मान्यताओं के अनुसार जहाॅ स्त्रीयों का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते हैं (मनुस्मृति) सृष्टि-सृजन और मानवीय सभ्यता के विकास में स्त्री व पुरूष दोनों की समान सृजनात्मक भूमिका रही है। ये दोनों एक दूसरे के पूरक एवं सहयोगी है। नारी अपने विविध रूपों में पुरूष का संवर्धन, प्रोत्साहन और शक्ति प्रदान करती है। माता के रूप में नारी पुरूष के चरित्र की संरोपण भूमि है। पत्नी के रूप में नारी पुरष उत्कर्ष का प्रसार स्तम्भ है। भिन्न-भिन्न देश, काल एवं परिस्थियों में महिलाओं की स्थिति, योगदान एवं स्वरूप को लेकर मतांतर रहे हैं।साहित्य एवं ज्ञान लोक ने नारी को गृह कार्य एवं काम प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है, तो काव्यकारों ने सौदर्य-बोधक रूवरूप में नारी निर्माण की ईसप्रक्रिया से समाज में महिलाओं की स्थिति असमानता, शोषण व उत्पीड़न के अनुभवों से जुडती चली गयी। उसे समाज में द्वितीय दर्जा दे दिया गया। वर्तमान समाज अर्थवाद का दास बनता जा रहा है। जहाॅ सम्पत्ति की अनियमिता से अधिक महत्व दिया जाता है। पूंजीवाद से सत्तावाद तथा सत्तावाद, सम्पत्ति, विलासितावाद, भेगवाद की ओर बढ़ रहा है। आदर्शत्मक मूल्यों का इस वर्तमान समाज में कोई महत्व नही है। महिलाओं के अधिकारों के विभिन्न तरीके है जिसमें महिलाओं के साथ ही अबोध बालिकाएं भी सदियों से पुरूषों द्वारा अधिकारों के हनन की शिकार रही है तथा वर्तमान में भी इस स्थिति में ज्यादा सुधार नही हुआ है जबकि अन्तर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय व स्थानीय स्तरों पर महिलाओं की स्थिति को सुधार के लिए विशेष प्रावधान किए गये है। विश्व जनगणना 2011 के अनुसार विश्व की कुला जनसंख्या की लगभग आधी जनसंख्या महिलाओं की है। अर्थात् प्रारम्भ से ही विश्व में महिलायें समाज का एक अभिन्न अंग है परन्तु फिर भी महिलाओं की स्थिति भारत में ही नही अपितु विश्व के सभी देशों में प्रारम्भिक काल से ही दयनीय रही है। महिला विकास यात्रा संक्रमण से गुजर रही है जिसमें सकारात्मक तत्वों का समन्वय है इस शोध पत्र के अध्य्यन का उद्देश्य महिलाओं में सशक्तिकरण एवं जागरूकता लाना है साथ ही समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान पैदा करना है। स्वतन्त्रता के पश्चात् भारतीय नारी की स्थिति में काफी सुधारात्मक परिवर्तन हुये है। आजादी के 71 वर्षों के पश्चात् हम यदि कानूनी दृष्टिकोण से नारी के प्रति अपराधों को रोकने के लिए बनाये गये अधिनियमों की विवेचना करते है तो स्पष्ट परिलक्षित होता है की हमारे देश में नारी की गरिमामयी स्थिति को बनाये रखने के लिए काफी सारे कानून बनाये गये है, किन्तु पर्याप्त कानूनी शिक्षा के आभाव में कानून की जानकारी उनको नही मिल पाती। यहाॅ तक कि अधिकांश महिलाओं को यह ज्ञात नही होता कि उन्हें कौन-कौन से अधिकार प्राप्त है। प्रस्तुत शोध पत्र में महिलाओं के उत्थान एवं उनके प्रति अपराधों को रोकने हेतु कौन-कौन से अधिकार है इसके बारे में वर्णन किया गया है।
Keywords:भारतीय महिला, संविधान, अधिकार, जागरूकता
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