| Abstract: | भारत में शिक्षा की उत्पत्ति वैदिक युग से हुई है, प्राचीन साहित्यों जैसे वेद, उपनिषद आदि का ज्ञान ऋषिमुनियों के द्वारा प्राप्त होता रहा है एवं अनेक विद्वानों द्वारा ज्ञान का प्रसार किया गया जिसमें चरक सुश्रुत, आर्यभट्ट प्रमुख रहे, भारतीय शिक्षा परंपरा आत्मज्ञान के साथ-साथ गुरू व शिष्य का संबंध हमेशा सर्वाधिक रोचक व महत्वपूर्ण सभ्यता को दर्शाती है, शिक्षा के द्वारा ही मनुष्य अपना आजीविका का उत्तम साधन प्राप्त करता है, शिक्षा जीवन यापन करने वाला एक सही मार्ग प्रसस्त करता है शिक्षा मनुष्य का शाररिक, मानसिक व बौद्धिक उत्थान का प्रमुख साधन है शिक्षा के क्षेत्र में प्राचीन परंपरा में गुरू शिष्य को ज्ञान देते आया है, साथ ही शिष्य का परीक्षा की भी व्यवस्था हुआ करती थी जिसमें गुरूओं द्वारा शिष्यों का मानसिक परीक्षा होता था, शिक्षा प्रणाली व्यवस्था का एक तरफ परिवर्ततन होता जा रहा साथ ही भारत सरकार द्वारा शिक्षा में हर प्रकार का बुनियादी ढांचा तैयार कर छात्र-छात्राओं के हित को ध्यान में रखते हुए अनेको सुधार के प्रयास पर तत्तपर है, व छात्र हित से देश समाज में बदलाव व परिवर्तन आवश्यक है राष्ट्रीय शिक्षा नीति से देश की युवा पीढी को नई ज्ञान व तकनीक से जोड़कर उनके अगामी भविष्य में सुधारात्मक बदलाव की ओर बढ़ रही है साथ ही उनकी बौद्धिक विकास में बढोतरी हो रही है भारतीय ज्ञान व प्राचीन कला का समावेश होने के कारण नई तकनीक का प्रादूर्भाव हो रहा है जिसके कारण नई शिक्षा नीति आज पूरे भारत वर्ष में शिक्षा की व्यवस्था को विकसित कर रही है भारत में समग्र एवं मीश्रित विषयों के ज्ञान अर्जन से विज्ञान की समृद्ध व अनुशीलन मे शिक्षण व शिक्षा माध्यम में स्वदेशी ज्ञान एवं परम्परा को आगे बढ़या जा रहा है इसके साथ ही अन्य सुविधाएँ जैसे विभिन्न प्रकार के चैनल द्वारा शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्ता पूर्ण बनाया जा रहा है। |