पुरूषों की विवाह पहचान का विश्लेषणात्मक अध्ययन

Subject:Political Science
Title:पुरूषों की विवाह पहचान का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author(s):डॉ. संजू & अनिलराज
Published on:28th February 2026
Published by:Lyceum India
Name of the Journal:Lyceum India Journal of Social Sciences
ISSN/E-ISSN:3048-6513
Volume & Issue:Volume: 3, Issue: 2
Pages:109-113
Original DOI (if any):10.5281/zenodo.18797795
Repository DOI: 
Abstract:समाज में विवाह का यदि अर्थ समझे तो महिला पुरूष एक होकर समाज को सुचार ढ़ग से संचालित करना है किन्तु यदि पितृ समाज को समझे जिसमें समाज या देश में घर के अंदर स्त्री एवं घर के बाहर पुरूष का काम हमें ऐतिहासिक परिट्टश्य से देखने को मिलता है साथ ही जहा काम से लेकर पहनावा व निर्णय की स्वतंत्रता या फैसला लेने की आजादी अधिकार पुरूषप्रधान समाज में पुरूषों को प्राप्त है जिसमें महिला भागीदार शून्य है भारत देश में हिन्दू विवाह अधिनियम 1995 के तहत जो संसद द्वारा पारित एक कानून है जो हिन्दू विवाह से संबधित है जिसमे विवाह से संबंधित हो रहे समस्या जैसे तलाक भरण पोषण की समस्या से निजात पाया जा सके भारत देश मे अधिकतर नारीवादी वैज्ञानिक हुए जिन्होने अपने अनेक प्रकार की पुस्तको के माध्यम से अपने विचारों को साझा कर पुरूष प्रधान समाज में समस्या झेल रही महिलाओं का समाधान का प्रयास किया परन्तु समस्या बढ़ती गई कम नहीं हुई समाज की बड़ी समस्या है कि लोग स्त्री, पुरूष के जैविक अंतर को नहीं समझते और असमानता करते है साथ ही समाजिक मान्यताओं प्रथाओं से उपजी अंतर को समाज में बाटकर समस्या का कारण बने बैठ है परन्तु निराकरण का प्रयास केवल महिलाएँ ही कर रही क्योकि इस समाज में कहावत है दर्द उसे महसूस होता जिसे चोट लगती है।
Keywords:समाज, पुरूषप्रधान देश, स्त्री समाजिक बुराई,
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