| Abstract: | इक्कीसवीं शताब्दी को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का युग कहा जाता है। इंटरनेट तथा सोशल मीडिया के तीव्र विस्तार ने मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी की भाषा, अभिव्यक्ति, व्यवहार, सांस्कृतिक दृष्टिकोण तथा सामाजिक संबंधों में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। सोशल मीडिया केवल संचार का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह नई भाषिक संरचनाओं, सांस्कृतिक प्रतीकों और सामाजिक मूल्यों के निर्माण का सक्रिय मंच बन चुका है। इस शोध-पत्र का उद्देश्य सोशल मीडिया के कारण युवा पीढ़ी की भाषा एवं संस्कृति में हो रहे परिवर्तनों का समालोचनात्मक अध्ययन करना है। अध्ययन में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार इंस्टेंट मैसेजिंग, रील संस्कृति, मीम संस्कृति, इमोजी, हैशटैग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल उपकरण भाषा के स्वरूप को परिवर्तित कर रहे हैं। साथ ही यह भी विवेचित किया गया है कि इन परिवर्तनों का भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, लोकभाषाओं तथा युवा पहचान पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। यह अध्ययन गुणात्मक पद्धति पर आधारित है, जिसमें पुस्तकों, शोध-पत्रों, समाचार स्रोतों तथा डिजिटल माध्यमों के विश्लेषण का उपयोग किया गया है। अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि सोशल मीडिया ने भाषा को अधिक गतिशील, संक्षिप्त तथा वैश्विक बनाया है, किन्तु इसके साथ भाषिक शुद्धता, सांस्कृतिक निरंतरता तथा सामाजिक संवेदनशीलता जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुई हैं। |