पंचायती राज व्यवस्था – एक विशलेषण

Subject:Public Policy \ Public Administration
Title:पंचायती राज व्यवस्था – एक विशलेषण
Author(s):न्याज अहमद खां
Published on:30th June 2026
Published by:Lyceum India
Name of the Journal:Lyceum India Journal of Social Sciences
ISSN/e-ISSN:3048-6513
Volume & Issue:Volume: 3, Issue: 7
Pages:137-141
Original DOI (if any):10.5281/zenodo.21005783
Repository DOI: 
Abstract:भारतीय शासन व्यवस्था में स्थानीय लोकतंत्र को लोकप्रिय बनाने के लिए स्थानीय निकायांे को मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है। स्थानीय क्षेत्रों में पंचायती राज की व्यवस्था ऐसा ही प्रयास है। पंचायती राज स्वतंत्र भारत की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक खोज है। इसका संबंध ग्रामीण क्षोत्रों में स्थानीय प्रशासन से है। पंचायती राज में ग्रामीण क्षेत्रों के स्थानीय प्रशासन का कार्य स्थानीय लोगों तथा उनके प्रतिनिधियों को सौंपा जाता है। भारत में ग्रमीण क्षेत्रों का प्रशासन प्राचीन काल से चला आ रहा है। महात्मा गाँधी इन समुदायों अर्थात् पंचायतांे को स्वशासन की ईकाइयाँ बनाने की इच्छा व्यक्त करते थे। अंग्रेजी काल में पूर्व की पंचायतांे की व्याख्या समाप्त कर दी गई तथा उसके स्थान पर जमींनदारी तथा रैयतवारी आरंभ कर दी गई। स्वतंत्रता के पश्चात इन ग्रमीण क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था वापस लाने का प्रयास किया गया। भारतीय संविधान मे भारत में संधीय लोकतंत्र की स्थापना की ग्ई है। संधीय लोकतांत्रिक प्रणाली के अनुसार भारत में राजधानी से ग्रमीण क्षेत्रों तक सत्ता का विकेन्द्रीकरण इस तरह से किया गया है। भारत में तीन चैथाई जनता ग्रमीण है जो देश तथा राज्य की राजधानियों से दूर दराज क्षेत्रों में है। संविधान के अनुसार देश की संधीय व्यवस्था को मुख्य रूप से तीन स्तरों मे बाँटा ग्या है। सर्वोच्च स्तर पर केन्द्रीय सरकारए राज्य स्तर पर राज्य सरकार और स्थानीय स्तर पर स्थानीय सरकार होता है। 
Keywords:भारत में पंचायतीए राज व्यवस्था का विकास एवं 73 वाँ संविधान संशोधन
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