समकालीन भारत में लैंगिक असमानता: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Subject:Gender Studies
Title:समकालीन भारत में लैंगिक असमानता: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author(s):ममता मीणा
Published on:30th September 2025
Published by:Lyceum India
Name of the Journal:Lyceum India Journal of Social Sciences
ISSN/E-ISSN:3048-6513
Volume & Issue:Volume: 2, Issue: 4
Pages:114-119
Original DOI (if any):10.5281/zenodo.17222922
Repository DOI: 
Abstract:लैंगिक समानता भारतीय संविधान के मूल्यों तथा सतत विकास लक्ष्यों ;ैक्ळेद्ध की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक हैए किन्तु समकालीन भारत में लैंगिक असमानता अब भी विभिन्न रूपों में विद्यमान है। यह शोध पत्र विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से शिक्षाए स्वास्थ्यए रोजगारए राजनीतिक प्रतिनिधित्व तथा सामाजिक.सांस्कृतिक संरचनाओं में मौजूद लैंगिक असमानताओं का अध्ययन करता है। द्वितीयक स्रोतों जैसे जनगणना रिपोर्टए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण ;छथ्भ्ैद्धए सतत विकास रिपोर्ट तथा नीतिगत दस्तावेज़ों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि प्रगति के बावजूद महिलाएँ आज भी निर्णय.निर्माण प्रक्रियाओंए वेतन संरचना और कार्यस्थल पर समान अवसर से वंचित हैं। संवैधानिक स्तर पर अनुच्छेद 14 ;समानता का अधिकारद्धए अनुच्छेद 15 ;भेदभाव का निषेधद्धए अनुच्छेद 16 ;सार्वजनिक रोजगार में समान अवसरद्धए अनुच्छेद 39 ;राज्य के नीति निदेशक तत्वों में पुरुषों व महिलाओं के लिए समान अधिकारद्ध तथा अनुच्छेद 42 ;मातृत्व संरक्षणद्ध महिलाओं को महत्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। वहींए सरकार द्वारा बेटी बचाओए बेटी पढ़ाओए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजनाए सुकन्या समृद्धि योजनाए महिला शक्ति केंद्र योजना तथा महिला आरक्षण विधेयक जैसी पहलें लैंगिक समानता की दिशा में उल्लेखनीय कदम हैं। इन पहलों ने शिक्षाए स्वास्थ्य एवं आर्थिक भागीदारी में सुधार लाने का प्रयास किया हैए फिर भी उनके प्रभावी क्रियान्वयन और सामाजिक मानसिकता में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता बनी हुई है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि लैंगिक असमानता न केवल सामाजिक न्याय के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करती हैए बल्कि भारत के सामाजिक. आर्थिक विकास एवं लोकतांत्रिक सुदृढ़ता को भी प्रभावित करती है। अतः संवैधानिक सुरक्षाए समावेशी नीतियाँए लैंगिक संवेदनशील प्रशासनिक ढाँचे तथा सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन ही वास्तविक लैंगिक समानता की प्राप्ति के लिए आवश्यक हैं।
Keywords:लैंगिक असमानताए, समकालीन भारत, महिला, सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, सतत विकास लक्ष्य, सार्वजनिक नीति, सरकारी पहल, संवैधानिक प्रावधान
 Download PDF

Leave a Reply