| Subject: | Linguistics : Hindi |
| Title: | उपन्यासकार शिवानी का व्यक्तित्व |
| Author(s): | कु. सपना |
| Published on: | 30th January 2026 |
| Published by: | Lyceum India |
| Name of the Journal: | Lyceum India Journal of Social Sciences |
| ISSN/E-ISSN: | 3048-6513 |
| Volume & Issue: | Volume: 3, Issue: 1 |
| Pages: | 208-210 |
| Original DOI (if any): | 10.5281/zenodo.18796201 |
| Repository DOI: | |
| Abstract: | व्यक्तित्व का अर्थ हिन्दी में प्रायः अंग्रेजी शब्द श्पर्सनैलिटी का पर्याय बनकर प्रयुक्त होता है। पर्सनैलिटी शब्द की व्युत्पति लैटिन के पर्साना से मानी जाती है। ग्रीक नाट्यगृह का एक ग्रीक अभिनेता प्रायः एक मुखावरण चेहरे पर लगाये रखता था। इस मुखौटे को पर्साना कहते थे, क्योंकि वह उसी में से बात करता था और संभवतः यहीं से इस पर्सानाश् शब्द का प्रयोग हर व्यक्ति विशेष के लिए होने लगा। धीरे-धीरे पर्साना शब्द की व्यक्तित्व का पर्याय माना गया। व्यक्तित्व का तात्पर्य किसी व्यक्ति के उस रूप से है जैसा वह दूसरों को प्रतीत होता है और उसका अंतः और बाह्य दोनों रूप स्पष्ट हो जाता है। व्यक्तित्व का मूल्यांकन व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों के आधार पर किया जाता है शारीरिक पक्ष, बौद्धिक पक्ष, चारित्रिक पक्ष, भावात्मक पक्ष इन चारों पक्षों का सबल समावेश शिवानी के व्यक्तित्व में मिलता है। |
| Keywords: | व्यक्तित्व, मूल्यंाकन, गौण, यथार्थवादिता, स्वातंत्रयोत्तर आधुनिकतावादी |
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