दिल्ली में असंगठित क्षेत्र के नए श्रमिकों के अधिकारों का संघर्ष

Subject:Sociology \ Economics
Title:दिल्ली में असंगठित क्षेत्र के नए श्रमिकों के अधिकारों का संघर्ष
Author(s):केशव सैनी
Published on:30th April 2026
Published by:Lyceum India
Name of the Journal:Lyceum India Journal of Social Sciences
ISSN/E-ISSN:3048-6513
Volume & Issue:Volume: 3, Issue: 5
Pages:274-282
Original DOI (if any):10.5281/zenodo.19690867
Repository DOI: 
Abstract:यह लेख दिल्ली में असंगठित क्षेत्र के नए श्रमिकों के अधिकारों और उनके समकालीन संघर्ष का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा असंगठित श्रम पर आधारित है, किंतु इन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, स्थिर आय और विधिक संरक्षण का पर्याप्त लाभ प्राप्त नहीं हो पाता। विशेष रूप से दिल्ली जैसे महानगर में प्रवासी मजदूर, निर्माण श्रमिक, घरेलू कामगार तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर शहरी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हैं। लेख में संगठित और असंगठित क्षेत्र की अवधारणा, श्रम कानूनों की सीमाएँ, सामाजिक-आर्थिक असुरक्षा, लैंगिक असमानता तथा गिग इकॉनमी के उदय से उत्पन्न नई चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। यह अध्ययन दर्शाता है कि विधिक प्रावधानों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच एक गहरा अंतर विद्यमान है। डिजिटल श्रम के विस्तार ने रोजगार के नए अवसर तो प्रदान किए हैं, परंतु श्रमिकों की कानूनी स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। अंततः लेख यह तर्क प्रस्तुत करता है कि असंगठित और गिग श्रमिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नीतिगत सुधार, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार तथा जागरूकता की आवश्यकता है, ताकि आर्थिक विकास के साथ सामाजिक न्याय की स्थापना भी सुनिश्चित की जा सके।
Keywords:असंगठित क्षेत्र, गिग इकॉनमी, श्रमिक अधिकार, सामाजिक सुरक्षा, शहरी श्रम
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