| Abstract: | जी.एस.टी. भारत में एक प्रकार का सुव्यवस्थित और पारदर्शी संरचना है जिसके तहत् भारत देश सतत् विकास को बढ़ावा देता है। इसके माध्यम से नवीन तकनीकों के साथ उसे उपयोग में लाकर देश के प्रत्येक क्षेत्र में विकास कर देश की प्र्रगति को बढ़ा सकता है, जिससे देश के मानव जीवन में अधिक बदलाव कर उनकी आर्थिक सामाजिक व राजनीतिक स्तर पर सुधार किया जा सकता है, देश में जी.एस.टी. यानि वस्तु सेवा कर का सतत् विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें देश एक कर के माध्यम से कर को सरल व पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया व देश की सरकार ने जी.एस.टी. के माध्यम से आम जनता से लेकर व्यापार एवं एवं वाणिज्य के साथ-साथ देश के सम्पूर्ण क्षेत्र को जी.एस.टी से जोड़कर विकास को बढ़ावा दे रहा है। भारत में प्रथम बार वर्ष 2000 में यह विचार को प्रस्तुत श्री अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा किया गया, साथ ही डाॅ. विजय केलकर ने जी.एस.टी. के माॅडल में सुधार किया। जी.एस.टी. के लिए एक जी.एस.टी. परिषद बनाया गया यह परिषद जी.एस.टी. से जुड़ी भिन्न-भिन्न प्रकार के नियम में संशोधन के लिए एक प्रमुख समिती है । विश्व में जी.एस.टी. की शुरूआत 1954 में फ्रास देश में हुआ था भारत मे पहली बार जी.एस.टी. परिषद के अध्यक्ष श्री अरूण जेटली जी को बनाया गया था। भारत में जी.एस.टी. 20 अप्रैल 2017 में केन्द्रिय विधेयक लोकसभा व राज्यसभा में पारित कि गई, 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया, भारतीय संविधान में संशोधन 101वी कर किया गया, व देश के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी एवं पी.एम. श्री नरेद्र मोदी ने 1 जुलाई को दिल्ली के संसद भवन के सेट्रल हाल में इसका शुभारंभ किया, भारत में असम राज्य में पहली बार लागू किया भारत में दोहरी जी.एस.टी. प्रणाली लागू है, जिसका अर्थ है केन्द्र व राज्य सरकार के वस्तु कर वसूलने का अधिकार भारत का एक मात्र राज्य जम्मू कश्मीर जहाँ जी.एस. टी. अधिनियम लागू नहीं है, जी.एस.टी. भारत में एक जटिल संरचना थी क्याकि केन्द्रिय उत्पाद, शुल्क, मूल्य, आदि की समस्या के समाध के लिए इसे लागू कर सम्पूर्ण भारत के नागरिकों के लिए यह प्रारंभ किया गया है। |