| Subject: | International Relations \ Political Science |
| Title: | पश्चिम एशिया संकट में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता: संतुलनकारी कूटनीति या रणनीतिक दुविधा |
| Author(s): | डॉ. प्रशांत कुमार |
| Published on: | 30th April 2026 |
| Published by: | Lyceum India |
| Name of the Journal: | Lyceum India Journal of Social Sciences |
| ISSN/E-ISSN: | 3048-6513 |
| Volume & Issue: | Volume: 3, Issue: 5 |
| Pages: | 283-296 |
| Original DOI (if any): | 10.5281/zenodo.19690970 |
| Repository DOI: | |
| Abstract: | इतिहास में कुछ संकट ऐसे होते हैं जो केवल भू-भाग नहीं बदलते — वे विचारधाराओं की परीक्षा लेते हैं, राष्ट्रों की नीतिगत आत्मा को उघाड़ते हैं। 2023-2026 का पश्चिम एशिया संघर्ष ऐसा ही एक ऐतिहासिक अग्निकुंड है। हमास के इज़राइल पर आघात से आरंभ हुई यह त्रासदी, ईरान-इज़राइल के प्रत्यक्ष टकराव, जून 2025 के ‘बारह-दिवसीय युद्ध’ और अंततः 28 फरवरी 2026 के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ तक पहुँचते-पहुँचते केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रही — यह एकध्रुवीय विश्व-व्यवस्था के अवसान और बहुध्रुवीय अनिश्चितता के उदय का घोषणापत्र बन गई। भारत के लिए यह संकट एक दर्पण की भाँति है — जिसमें उसकी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ का वास्तविक, निर्मम और अनरंजित प्रतिबिम्ब दिखता है। जब होर्मुज बंद हुआ, तो एलपीजी सिलेंडरों की कतारें केवल ऊर्जा-संकट की कतारें नहीं थीं — वे उस नीतिगत रिक्तता की कतारें थीं जो ‘सबसे जुड़े, किसी पर निर्भर नहीं’ के दर्शन और कड़वी यथार्थता के बीच दशकों से चली आ रही खाई से उत्पन्न हुई थीं। केंद्रीय प्रश्न यह है: क्या भारत की पश्चिम एशिया नीति एक सुचिंतित ‘संतुलनकारी कूटनीति’ थी — या वह संरचनात्मक बंधनों और तात्कालिक दबावों के बीच पिसती एक ‘रणनीतिक दुविधा’ मात्र? प्रस्तुत शोध पत्र यथार्थवाद, नव-उदारवाद और रचनावाद के सैद्धांतिक त्रिकोण में भारत की पश्चिम एशिया नीति का विश्लेषण करता है। यह प्रस्थापना प्रस्तुत करता है कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता न तो पूर्णतः एक कार्यशील संतुलन-नीति रही, न ही एक निष्क्रिय दुविधा — बल्कि यह एक ‘अपूर्ण बहु-संरेखण’ की दशा है, जो सैद्धांतिक रूप से उचित होते हुए भी संरचनात्मक सीमाओं और नीतिगत भूलों के कारण अपनी पूर्ण क्षमता नहीं पा सकी। |
| Keywords: | रणनीतिक स्वायत्तता, संतुलनकारी कूटनीति, रणनीतिक दुविधा, बहु-संरेखण, होर्मुज संकट 2026, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी, बारह-दिवसीय युद्ध, मौन संरेखण, यथार्थवाद, ग्लोबल साउथ। |
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