| Abstract: | स्वतंत्रता के तुरंत उपरांत भारत और अमेरिका सम्बन्ध बहुत अच्छे नहीं थे। प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में तनाव और अधिक बढ़ गए थे। तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान की समस्या के समय दोनों देशों के मध्य सम्बन्ध और कटुतापूर्ण हो गए थे। निःसन्देह भारत-अमेरिका सम्बन्धों में प्रगति धीमी थी। हालाँकि, 1990 के दशक में भारत की आर्थिक नीतियों में बदलाव और पिछले दशक में हुई अभूतपूर्व प्रगति ने दोनों देशों के मध्य सम्बन्ध को रणनीतिक और बहुआयामी बना दिया है। बीसवीं सदी के अन्तिम दशक में शीत युद्ध की समाप्ति, सोवियत संघ का विघटन, भारत में बडे़ पैमाने पर आर्थिक सुधार एवं ‘वैश्वीकरण-निजीकरण-उदारीकरण’का प्रयोग, भारत द्वारा सन् 1998 में पुनः परमाणु परीक्षण के साथ-साथ अमरीका को चीन एवं इस्लामिक कट्टरवाद से मिल रही चुनौतियाँ आदि ने इक्कीसवीं सदी में दोनों देशों के मध्य सम्बन्धों की पृश्ठभूमि निर्मित की है। भारत और अमेरिका ने 21वीं सदी के लिए यू.एस.-इंडिया कॉम्पैक्ट शुरू किया है, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा में सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है। व्यापार क्षेत्र की बात करें तो दोनों देशों ने सन् 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन तक दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दोनों देशों के मध्य आतंकवाद रोधी सहयोग में सूचना का आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, परिचालन सहयोग और आतंकवाद रोधी भारत-अमेरिका संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से नियमित संवाद शामिल है। वर्ष 2017 में दोनों पक्षों ने घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय नामित आतंकवादी सूची प्रस्तावों पर एक संवाद शुरू किया है। वर्तमान में दोनों देश क्वाड के सदस्य है, जिसे चीन को लक्षित कर संगठित किया था। विगत कुछ वर्षो में, मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में, भारत का झुकाव अमेरिका की तरफ रहा है जो दोनों देशो की मधुर होते सम्बन्ध को दर्शाता है मगर अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ़ लगाये जाने के परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इतना ही नहीं शंघाई सहयोग संगठन में भारत की सक्रिय सहभागिता और भारत-चीन-रूस के मध्य बढ़ती निकटता भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के साथ-साथ क्वाड प्रसंगिकता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है। |
| Keywords: | रक्षा सम्बन्ध, सहभागिता, परमाणु ऊर्जा, महाशक्ति, शक्ति सन्तुलन,पूंजीवादी लोकतान्त्रिक,शंघाई सहयोग संगठन, ब्रिक्स |